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कोई ये कैसे बताए - Koi Ye Kaise Bataye (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: जगजीत सिंह

कोई ये कैसे बताये के वो तन्हाँ क्यों है
वो जो अपना था, वही और किसी का क्यों है
यही दुनिया है तो फिर, ऐसी ये दुनिया क्यों है
यही होता है तो, आख़िर यही होता क्यों है

इक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ लें दामन
उसके सीने में समा जाए, हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत है तो फिर, फासला इतना क्यों है

दिल-ए-बरबाद से निकला नहीं अब तक कोई
इक लुटे घर पे दिया करता है दस्तक कोई
आस जो टूट गयी, फिर से बंधाता क्यों है

तुम मसर्रत का कहो या इसे ग़म का रिश्ता
कहते हैं प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यों है


तू नहीं तो ज़िन्दगी में - Tu Nahin To Zindagi Mein (Chitra Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: कुलदीप सिंह
Lyrics By: इफ्तिकार इमाम सिद्दीकी
Performed By: चित्रा सिंह

तू नहीं तो ज़िन्दगी में और क्या रह जायेगा
दूर तक तन्हाईयों का सिलसिला रह जायेगा
तू नहीं तो ज़िन्दगी में...

दर्द की सारी तहें, और सारे गुज़रे हादसे
सब धुआँ हो जायेंगे, इक वाक़िया रह जायेगा
तू नहीं तो ज़िन्दगी में...

यूँ भी होगा वो मुझे, दिल से भुला देगा मगर
ये भी होगा खुद उसी में, इक ख़ला रह जायेगा
तू नहीं तो ज़िन्दगी में...

दायरे इन्कार के, इक़रार की सरगोशियाँ
ये अगर टूटे कभी तो, फ़ासला रह जायेगा
तू नहीं तो ज़िन्दगी में...


तेरे खुशबू में बसे ख़त - Tere Khushboo Mein Base Khat (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: राजिंदरनाथ रहबर
Performed By: जगजीत सिंह

तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त, मैं जलाता कैसे
प्यार में डूबे हुये ख़त, मैं जलाता कैसे
तेरे हाथों के लिखे ख़त, मैं जलाता कैसे

जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाये रखा
दीन जिनको, जिन्हें ईमान बनाये रखा
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

जिनका हर लफ़्ज़ मुझे याद था पानी की तरह
याद थे मुझको जो पैग़ाम-ए-ज़ुबानी की तरह
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे
कभी दिन में तो कभी रात को उठ कर लिखे
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ
तेरे खुशबू में बसे ख़त...


झुकी झुकी सी नज़र - Jhuki Jhuki Si Nazar (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1982)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed by: जगजीत सिंह

झुकी-झुकी सी नज़र
बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही
दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

वो पल के जिसमें मोहब्बत जवान होती है
उस एक पल का तुझे इंतज़ार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...


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