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एक कलि दो पत्तियाँ - Ek Kali Do Pattiyan (Bhupen Hazarika, Main Aur Mera Saya)



Movie/Album: मैं और मेरा साया (1970)
Music By: भूपेन हज़ारिका
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: भूपेन हज़ारिका

एक कलि दो पत्तियाँ
नाज़ुक नाज़ुक उँगलियाँ
तोड़ रही हैं कौन ये
एक कलि दो पत्तियाँ
रतनपुर बागीचे में

खुल के खिलखिलाती
सावन बरसाती
हँस रही हैं कौन ये
मोगरे जगाती, मोगरे जगाती
एक कलि दो पत्तियाँ...

जुगनू और लक्ष्मी की
लगन ऐसी आई
डाली डाली झूमी
ले के अंगड़ाई, हो ले के अंगड़ाई
एक कलि दो पत्तियाँ...

जुगनू और लक्ष्मी की
प्रीत रंग लाई
नन्हें से एक मुन्ने से
झुमकी जगमगाई, हो झुमकी जगमगाई
एक कलि दो पत्तियाँ...

एक कलि दो पत्तियाँ
खिलने भी न पाई थी
तोड़ने उस बागीचे में
दानव आया रे, हो दानव आया
दानव की परछाई में
काँप रही थी पत्तियाँ
बुझने लगी मासूम कलि
दानव की परछाई में, दानव की परछाई में

साए से बेदार हुए,
तामबरन सी बाहों के
ढोल मादल बजने लगी
मादल ऐसे बाजे रे
लाखों मिल के नाचे रे
आया एक तूफ़ान नया
दानव डर के भाग गया
मादल ऐसे गरजा रे
दानव डर के भागा रे
एक कलि दो पत्तियाँ...


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