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दूर अँधेरा हुआ मस्त सवेरा - Door Andhera Hua Mast Savera (Lata Mangeshkar, Do Phool)



Movie/Album: दो फूल (1958)
Music By: वसंत देसाई
Lyrics By: हसरत जयपुरी
Performed By: लता मंगेशकर

दूर अँधेरा हुआ, मस्त सवेरा हुआ
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे
धूप ख़ुशी की छाई, जान गले में आई
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे

डोले रे अंग-अंग, मस्ती की ताल पर
झूले पतंग जैसे, चुटकी की ताल पर
लहराऊँ-बलखाऊँ जैसे बदरिया
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे
दूर अँधेरा हुआ...

देखो जी देखो गोरी, नाचे छमा छम
जल की मछरिया तो, कूदे धमा धम
फूल बजाए, मंजीरे छना छन
बाजे जी दिल की ढोलक, धना धन
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे
दूर अँधेरा हुआ...

ऊँचे-ऊँचे अंबुआ के झूले पे झूलूँ
फूलों की बात क्या तारों को छू लूँ
शरमा के ओढूँगी, बादल चुनरिया
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे
दूर अँधेरा हुआ...

छेड़े पवन भी अपनी सितार को
मौजें नशे की आई बहार को
घूमे रे, झूमे रे सारी नगरिया
मैं नाचूँ रे, आज मैं गाऊँ रे
दूर अँधेरा हुआ...


मटक मटक नाचूँ रे - Matak Matak Nachoon Re (Aarti Mukherji, Do Phool)



Movie/Album: दो फूल (1958)
Music By: वसंत देसाई
Lyrics By: हसरत जयपुरी
Performed By: आरती मुखर्जी

मटक-मटक नाचूँ रे
देखो मटक-मटक नाचूँ रे
मैं तो चीनी की हूँ गुड़िया
जादू की हूँ पुड़िया
मटक-मटक नाचूँ रे
मटक मटक...

जब मैं नाचूँ, दुनिया नाचे
देखे मेरा दिल
रुक जाये हाथी, रुक जाये मोटर
रुक जाये लम्बी रेल
हूँ मैं छोटी, पर सबसे खोटी
सबसे मेरा मेल
मैं तो चीनी की हूँ गुड़िया...

पानी में भी आग लगा दूँ
पत्थर को पिघला दूँ
मेरे दम से जग में छम छम
दीपक चाँद बनाऊँ
फिर भी कितनी नाज़ुक़ हूँ मैं
इ कैसे बतलाऊँ
मैं तो चीनी की हूँ गुड़िया...

नगरी-नगरी फिरती जाऊँ
बिजली मेरा नाम
हँसना गाना, दिल बहलाना
ये है मेरा काम
बच्चों बूढ़ों और जवानों
आई तुमरे गाँव
मैं तो चीनी की हूँ गुड़िया...


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