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आपकी आँखों में कुछ महके - Aapki Aankhon Mein Kuch (Kishore, Lata)



Movie/Album: घर (1978)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: किशोर कुमार, लता मंगेशकर

आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं
आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में...

लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं
आपकी आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं
आपकी खामोशियाँ भी, आप की आवाज़ हैं
आपकी आँखों में...

आपकी बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं
बेवजह तारिफ़ करना आपकी आदत तो नहीं
आपकी बदमाशियों के ये नये अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में...


फिर वही रात है - Phir Wahi Raat Hai (Kishore Kumar)



Movie/Album: घर (1978)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: किशोर कुमार

फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की
रात भर ख्वाब में देखा करेंगे तुम्हें
फिर वही रात है...

काँच के ख्वाब हैं, आँखों में चुभ जायेंगे
पलकों पे लेना इन्हें, आँखों में रुक जायेंगे
ये रात है ख्वाब की, ख्वाब की रात है
फिर वही रात है...

मासूम सी नींद में, जब कोई सपना चले
हमको बुला लेना तुम, पलकों के पर्दे तले
ये रात है ख्वाब की, ख्वाब की रात है
फिर वही रात है...


आज कल पाँव ज़मीं पर - Aaj Kal Paanv Zameen Par (Lata Mangeshkar, Ghar)



Movie/Album: घर (1978)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: लता मंगेशकर

आज कल पाँव ज़मीं पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
लोग कहते हैं के बस हाथ की रेखा है
हमने देखा है दो तक़दीरों को जुड़ते हुए
आज कल पाँव...

नींद सी रहती है, हलका सा नशा रहता है
रात-दिन आँखों में इक चेहरा बसा रहता है
पर लगी आँखों को देखा है कभी उड़ते हुए
आज कल पाँव...

जाने क्या होता है हर बात पे कुछ होता है
दिन में कुछ होता है और रात में कुछ होता है
थाम लेना जो कभी देखो हमें उड़ते हुए
आज कल पाँव...


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