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इतना टूटा हूँ के - Itna Toota Hoon Ke (Ghulam Ali, Ghazal)



Lyrics By: मोईन नज़र
Performed By: गुलाम अली

इतना टूटा हूँ के छूने से बिखर जाऊँगा
अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाऊँगा

पूछकर मेरा पता वक्त रायदा न करो
मैं तो बंजारा हूँ क्या जाने किधर जाऊँगा
इतना टूटा हूँ के...

हर तरफ़ धुंध है, जुगनू है, न चराग कोई
कौन पहचानेगा बस्ती में अगर जाऊँगा
इतना टूटा हूँ के...

ज़िन्दगी मैं भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का
तू जहाँ मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊँग
इतना टूटा हूँ के...

फूल रह जायेंगे गुलदानों में यादों की नज़र
मै तो खुशबु हूँ फिज़ाओं में बिखर जाऊँगा
इतना टूटा हूँ के...


अपनी धुन में रहता हूँ - Apni Dhun Mein Rehta Hoon (Ghulam Ali, Ghazal)



Movie/Album: रंग तरंग (1999)
Music By:
गुलाम अली
Lyrics By:
नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली

अपनी धुन में रहता हूँ
मैं भी तेरे जैसा हूँ

ओ पिछली रुत के साथी
अब के बरस मैं तनहा हूँ
अपनी धुन में...

तेरी गली में सारा दिन
दुख के कंकर चुनता हूँ
अपनी धुन में...

मेरा दीया जलाये कौन
मैं तेरा खाली कमरा हूँ
अपनी धुन में...

अपनी लहर है अपना रोग
दरिया हूँ और प्यासा हूँ
अपनी धुन में...

आती रुत मुझे रोयेगी
जाती रुत का झोँका हूँ
अपनी धुन में...


उदास शाम किसी ख्वाब - Udaas Shaam Kisi Khwaab (Ghulam Ali, Mahtab)



Movie/Album: महताब (1991)
Music By: गुलाम अली
Lyrics By: क़तील शिफ़ई
Performed By: गुलाम अली

उदास शाम किसी ख्वाब में ढली तो है
यही बहुत है के ताज़ा हवा चली तो है

जो अपनी शाख़ से बाहर अभी नहीं आई
नई बहार की ज़ामिन वही कली तो है
उदास शाम किसी...

धुंआ तो झूठ नहीं बोलता कभी यारों
हमारे शहर में बस्ती कोई जली तो है
उदास शाम किसी...

किसी के इश्क़ में हम जान से गये लेकिन
हमारे नाम से रस्म-ए-वफ़ा चली तो है
उदास शाम किसी...

हज़ार बन्द हो दैर-ओ-हरम के दरवाज़े
मेरे लिये मेरे महबूब की गली तो है
उदास शाम किसी...


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