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आई अब की साल दिवाली - Aayi Ab Ki Saal Diwali (Lata Mangeshkar, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

आई अब की साल दिवाली
मुंह पर अपने खून मले
चारों तरफ है घोर अंधेरा
घर में कैसे दीप जले
आई अब की साल दिवाली...

बालक तरसे फुलझड़ियों को, दीपों को दीवारें
माँ की गोदी सूनी सूनी, आँगन कैसे संवारे
राह में उनकी जाओ उजालों
बन में जिनकी शाम ढले
आई अब की साल दिवाली...

जिनके दम से जगमग जगमग करती थी ये रातें
चोरी चोरी हो जाती थी मन से मन की बातें
छोड़ चले वो घर में अमावस
ज्योति लेकर साथ चले
आई अब की साल दिवाली...

टप-टप टप-टप टपके आंसू, छलकी खाली थाली
जाने क्या क्या समझाती है आँखों की ये लाली
शोर मचा है आग लगी है
कटते हैं पर्वत पे गले
आई अब की साल दिवाली...


दिल ने दिल से इकरार किया - Dil Ne Dil Se Iqraar Kiya (Alka Yagnik, Hariharan, Haqeeqat)



Movie/Album: हक़ीक़त (1995)
Music By: दिलीप सेन-समीर सेन
Lyrics By: नवाब आरज़ू
Performed By: अल्का याग्निक, हरिहरन

दिल ने दिल से इकरार लिया
हमने तुमसे प्यार किया
जानेमन जाने बहार
आ कर ले जी भर के प्यार
दिल ने दिल से...

बढ़ता ही जाये नशा प्यार का धीरे-धीरे
तुम बिन हम हैं अधूरे
दिल में रहे एक चुभन प्यार की तेरे-मेरे
ऐसे ही सांझ-सवेरे
वादा हमने दिलदार किया
हमने तुमसे...

दुनिया चले ना चले तुम मेरे साथ चलना
ऐसे ही हँसते रहना
यूँ ही रहे साथ हाथों में ये हाथ अपना
टूटे ना प्यारा सपना
दिल का सौदा एक बार किया
हमने तुमसे...


मैं ये सोच कर - Main Ye Soch Kar (Md.Rafi, Haqeeqat)



Movie/Album: हक़ीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था
के वो रोक लेगी, मना लेगी मुझको

हवाओं में लहराता आता था दामन
के दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको

कदम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे
के आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको

मगर उसने रोका, न उसने मनाया
न दामन ही पकड़ा, न मुझको बिठाया

न आवाज़ ही दी, न वापस बुलाया
मैं आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही आया

यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं...


खेलो ना मेरे दिल से - Khelo Na Mere Dil Se (Lata Mangeshkar, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना
खेलो ना मेरे दिल से...

मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किस लिये निगाह में
मंज़िल अपनी तुम अलग बसाओगे
मुझको छोड़ दोगे राह में
प्यार क्या दिल्लगी
प्यार क्या खेल है
खेलो ना मेरे दिल से...

क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ
क्यूँ मिले थे ज़िन्दगी के मोड़ पर
मुझको आसरा दिया था क्यूँ
प्यार क्या दिल्लगी...


मस्ती में छेड़ के तराना - Masti Main Ched Ke Tarana (Md.Rafi, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

मस्ती में छेड़ के तराना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

प्यार बहलता नहीं बहलाने से
लो मैं चमन को चला वीराने से
शमा है कब से जुदा परवाने से
अश्क़ थमेंगे नज़र मिल जाने से
दिल से मिलेगा दीवाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

मिल के वो पहले बहुत शर्माएगी
आगे बढ़ेगी मगर रुक जाएगी
हो के करीब कभी घबराएगी
और करीब कभी खिंच आएगी
खेल नहीं है मनाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

मुखड़े से ज़ुल्फ़ ज़रा सरकाऊँगा
सुलझेगा प्यार उलझ मैं जाऊँगा
पा के भी हाय बहुत पछताऊँगा
ऐसा सुक़ून कहाँ फिर पाऊँगा
और नहीं है ठिकाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...


होके मजबूर मुझे - Hoke Majboor Mujhe (Md.Rafi, Manna Dey, Talat Mahmood, Bhupinder Singh, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद, भूपिंदर सिंह, मन्ना डे

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दवा जान के खाया होगा
होके मजबूर मुझे...

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिये और ना बहाए होंगे
बन्द कमरे में जो ख़त मेरे जलाए होंगे
एक इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा
होके मजबूर मुझे...

उसने घबरा के नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ़ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा
होके मजबूर मुझे...

छेड़ की बात पे अरमां मचल आए होंगे
ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आए होंगे
सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा
होके मजबूर मुझे...

ज़ुल्फ़ ज़िद कर के किसी ने जो बनाई होगी
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी
बिजली नज़रों ने कई दिन ना गिराई होगी
रंग चहरे पे कई रोज़ न आया होगा
होके मजबूर मुझे...


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