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उस मोड़ से शुरू करें - Us Mod Se Shuru Karein (Jagjit Singh, Chitra Singh)



Movie/Album: द लेटेस्ट (1982)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: सुदर्शन फ़ाकिर
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
हर शय जहाँ हसीन थी, हम तुम थे अजनबी

लेकर चले थे हम जिन्हें जन्नत के ख़्वाब थे
फूलों के ख़्वाब थे वो मुहब्बत के ख़्वाब थे
लेकिन कहाँ है इनमें वो, पहली सी दिलकशी
उस मोड़ से शुरू...

रहते थे हम हसीन ख़यालों की भीड़ में
उलझे हुए हैं आज सवालों की भीड़ में
आने लगी है याद वो फ़ुर्सत की हर घड़ी
उस मोड़ से शुरू...

शायद ये वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया
अश्कों की चाँदनी से थी बेहतर वो धूप ही
उस मोड़ से शुरू...


ग़म का खज़ाना - Gham Ka Khazana (Jagjit Singh, Lata Mangeshkar, Sajda)



Movie/Album: सजदा (1991)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी
ये अफ़साना तेरा भी है, मेरा भी

अपने ग़म को गीत बना कर गा लेना
राग़ पुराना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

तू मुझको और मैं तुझको समझाऊं क्या
दिल दीवाना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

शहर मे गलियों-गलियों जिसका चर्चा है
वो अफ़साना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

मयख़ाने की बात न कर वाईज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...


मैं न हिन्दू न मुसलमान - Main Na Hindu Na Musalmaan (Jagjit Singh, Mirage)



Movie/Album: माईरेज (1996)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह

मैं न हिन्दू न मुसलमान, मुझे जीने दो
दोस्ती है मेरा इमान, मुझे जीने दो
मैं न हिन्दू न मुसलमां

कोई एहसां न करो मुझपे तो एहसां होगा
सिर्फ़ इतना करो एहसान, मुझे जीने दो
मैं न हिन्दू न मुसलमां

सब के दूख-दर्द को बस अपना समझ कर जीना
बस यही है मेरा अरमान, मुझे जीने दो
मैं न हिंदू न मुसलमां

लोग होते हैं जो हैरान मेरे जीने से
लोग होते रहें हैरान, मुझे जीने दो
मैं न हिंदू न मुसलमां...


आज हम बिछड़े हैं तो कितने - Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne (Jagjit Singh, Love is Blind)



Movie/Album: लव इज़ ब्लाइंड (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह

आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गए
मेरी आँखें सुर्ख़, तेरे हाथ पीले हो गए

कब की पत्थर हो चुकी थी, मुंतज़िर आँखें मगर
छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...

जाने क्या एहसास साज़-ए-हुस्न के तारों में है
जिनको छूते ही मेरे नग़मे रसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...

अब कोई उम्मीद है 'शाहिद', न कोई आरज़ू
आसरे टूटे तो जीने के वसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...


एक चमेली के मंडवे तले - Ek Chameli Ke Mandve Tale (Asha Bhosle, Md.Rafi, Cha Cha Cha)



Movie/Album: चा चा चा (1964)
Music By: इक़बाल क़ुरेशी
Lyrics By: मखदूम मोईउद्दीन
Performed By: आशा भोंसले, मो.रफ़ी, जगजीत सिंह

एक चमेली के मंडवे तले
मयकदे से ज़रा, दूर उस मोड़ पर
दो बदन प्यार की आग में जल गये
एक चमेली के मंडवे तले...

प्यार हर्फ़-ए-वफ़ा, प्यार उनका खुदा
प्यार उनकी चिता
दो बदन प्यार की...
एक चमेली के मंडवे तले...

ओस में भीगते, चाँदनी में नहाते हुए
जैसे दो ताज़ा रूह, ताज़ा दम फूल पिछले पहर
ठंडी ठंडी सबकरो-चमन की हवा
सर्फ़े-मातम हुई
काली-काली लटों से लिपट, गर्म रुखसार पर
एक पल के लिये रूक गयी
दो बदन प्यार की...

हमने देखा उन्हें, दिन में और रात में
नूर-ओ-ज़ुल्मात में
मस्जिदों के मीनारों ने देखा उन्हें
मंदिरों के किवाड़ों ने देखा उन्हें
मयकदे के दरारों ने देखा उन्हें
दो बदन प्यार की...

जगजीत सिंह
अज़ अज़ल ता अबद, ये बता चारागर
तेरी जंबील में
नुस्खा-ए-कीमिया-ए-मुहब्बत भी है
कुछ इलाजो-मुदावा-ए-उल्फ़त भी है
दो बदन प्यार की...


चाक-ए-जिगर के - Chak-e-Jigar Ke (Jagjit Singh, Love is Blind)



Movie/Album: लव इज़ ब्लाइंड (1998)
Music By: जगजीत सिंह

Lyrics By:
नदीम परमार
Performed By: जगजीत सिंह

चाक-ए-जिगर के सी लेते हैं
जैसे भी हो जी लेते हैं
चाक जिगर के...

दर्द मिले तो सह लेते हैं
अश्क मिले तो पी लेते हैं
चाक-ए-जिगर के...

आप कहें तो मर जाएँ हम
आप कहें तो जी लेते हैं
चाक-ए-जिगर के...

बेज़ारी के अंधियारे में
जीने वाले जी लेते हैं
चाक जिगर के...

हम तो हैं उन फूलों जैसे
जो काँटों में जी लेते हैं
चाक जिगर के...


कोई ये कैसे बताए - Koi Ye Kaise Bataye (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: जगजीत सिंह

कोई ये कैसे बताये के वो तन्हाँ क्यों है
वो जो अपना था, वही और किसी का क्यों है
यही दुनिया है तो फिर, ऐसी ये दुनिया क्यों है
यही होता है तो, आख़िर यही होता क्यों है

इक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ लें दामन
उसके सीने में समा जाए, हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत है तो फिर, फासला इतना क्यों है

दिल-ए-बरबाद से निकला नहीं अब तक कोई
इक लुटे घर पे दिया करता है दस्तक कोई
आस जो टूट गयी, फिर से बंधाता क्यों है

तुम मसर्रत का कहो या इसे ग़म का रिश्ता
कहते हैं प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यों है


तेरे खुशबू में बसे ख़त - Tere Khushboo Mein Base Khat (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: राजिंदरनाथ रहबर
Performed By: जगजीत सिंह

तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त, मैं जलाता कैसे
प्यार में डूबे हुये ख़त, मैं जलाता कैसे
तेरे हाथों के लिखे ख़त, मैं जलाता कैसे

जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाये रखा
दीन जिनको, जिन्हें ईमान बनाये रखा
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

जिनका हर लफ़्ज़ मुझे याद था पानी की तरह
याद थे मुझको जो पैग़ाम-ए-ज़ुबानी की तरह
मुझको प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे
साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे
कभी दिन में तो कभी रात को उठ कर लिखे
तेरे खुशबू में बसे ख़त...

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ
आग बहते हुये पानी में लगा आया हूँ
तेरे खुशबू में बसे ख़त...


मेरी आँखों ने चुना है - Meri Aankhon Ne Chuna Hai (Jagjit Singh, Alka Yagnik, Tarkeeb)



Movie/Album: तरकीब (2000)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, अलका याग्निक

चाँद भी देखा, फूल भी देखा
बादल, बिजली, तितली, जुगनूं
कोई नहीं है ऐसा
तेरा हुस्न है जैसा

मेरी निगाह ने, ये कैसा ख्वाब देखा है
ज़मीं पे चलता हुआ, माहताब देखा है

मेरी आँखों ने चुना है तुझको दुनिया देखकर
किसका चेहरा अब मैं देखूँ तेरा चेहरा देखकर
मेरी आँखों ने चुना है...

नींद भी देखी, ख्वाब भी देखा
चूड़ी, बिंदिया, दर्पण, खुशबू
कोई नहीं है ऐसा
तेरा प्यार है जैसा
मेरी आँखों ने चुना है...

रंग भी देखा, रूप भी देखा
रस्ता, मंज़िल, साहिल, महफ़िल
कोई नहीं है ऐसा
तेरा साथ है जैसा
मेरी आँखों ने चुना है...

बहुत खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी
बना दीजिए इनको किस्मत हमारी
उसे और क्या चाहिये ज़िन्दगी में
जिसे मिल गई है मुहब्बत तुम्हारी


चराग़-ओ-आफ़ताब गुम - Charaag-o-Aaftaab Gum (Jagjit Singh, Ghazal)



Movie/Album: ख़ुमार (2000)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: सुदर्शन फ़ाकिर
Performed By: जगजीत सिंह

चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम
बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम
बड़ी हसीन रात थी

मुझे पिला रहे थे वो
के ख़ुद ही शम्माँ बुझ गई
गिलास ग़ुम, शराब ग़ुम
बड़ी हसीन रात थी...

लिखा था जिस किताब में
के इश्क़ तो हराम है
हुई वही किताब ग़ुम
बड़ी हसीन रात थी...

लबों से लब जो मिल गए
लबों से लब ही सिल गए
सवाल ग़ुम. जवाब ग़ुम
बड़ी हसींन रीत थी...


कोई फरियाद - Koi Fariyad (Jagjit Singh, Tum Bin)



Movie/Album: तुम बिन (2001)
Music By: निखिल-विनय
Lyrics By: फैज़ अनवर
Performed By: जगजीत सिंह

कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर साँस रुकी हो जैसे

हर मुलाकात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

राह चलते हुए अक्सर ये गुमां होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे

एक लम्हें में सिमट आया सदियों का सफ़र
ज़िन्दगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे

इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मैं
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे
कोई फरियाद...


तेरी फरियाद - Teri Fariyad (Jagjit Singh, Rekha Bhardwaj, Tum Bin 2)



Movie/Album: तुम बिन 2 (2016)
Music By: निखिल-विजय, अंकित तिवारी
Lyrics By: फैज़-अनवर, शकील आज़मी
Performed By: जगजीत सिंह, रेखा भारद्वाज

अब कोई आस ना उम्मीद बची हो जैसे
तेरी फ़रियाद मगर मुझमें दबी हो जैसे
जागते-जागते इक उम्र कटी हो जैसे
अब कोई आस ना उम्मीद बची हो जैसे

रस्ते चलते हैं मगर पाँव हमें लगते हैं
हम भी इस बर्फ़ के मंज़र में जमे लगते हैं
जान बाकी है मगर साँस रुकी हो जैसे

वक़्त के पास लतीफे भी हैं मरहम भी है
क्या करूँ मैं कि मेरे दिल में तेरा ग़म भी है
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे

किसको नाराज़ करूँ, किससे खफ़ा हो जाऊँ
अक्स हैं दोनों मेरे किससे जुदा हो जाऊँ
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

रात कुछ ऐसे कटी है कि सहर ही न हुई
जिस्म से जां के निकलने की ख़बर ही ना मिली
ज़िन्दगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे

कैसे बिछडू़ँ कि वो मुझमे ही कहीं रहता है
उससे जब बच के गुज़रता हूँ तो ये लगता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे


रात आँखों में ढली - Raat Aankhon Mein Dhali (Jagjit Singh, Ghazal)



Movie/Album: तुम तो नहीं हो (2005)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: बशीर बद्र
Performed By: जगजीत सिंह

रात आँखों में ढली, पलकों पे जुगनू आए
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आएरात आँखों में ढली...

बस गई है मेरे एहसास में ये कैसी महक
कोई खुशबू मैं लगाऊँ तेरी खुशबू आए
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आए
रात आँखों में ढली...

उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इन्सान कियामुद्दतों बाद मेरी आँख में आँसूँ आए
रात आँखों में ढली...

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ माँगी थीकोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आई
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आए
रात आँखों में ढली...


तारीफ़ उस ख़ुदा की - Tareef Us Khuda Ki (Jagjit Singh, Chitra Singh, Ghazal)



Movie/Album: चिराग (1993)
Music By: जगजीत सिंह
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

तारीफ़ उस ख़ुदा की, जिस ने जहां बनाया
कैसी ज़मीं बनाई, क्या आसमां बनाया
तारीफ़ उस ख़ुदा की

मिट्टी से बेल बूटे क्या खुशनुमा उगाए
पहना के सब्ज़ खिल्लत उनको जवाँ बनाया
तारीफ़ उस ख़ुदा की...

सूरज से हमने पाई गर्मी भी रौशनी भी
क्या खूब चश्मा तूने ऐ महरबां बनाया
तारीफ़ उस ख़ुदा की...

हर चीज़ से है उसकी कारीगरी टपकती
ये कारखाना तूने कब रायगाँ बनाया
तारीफ़ उस ख़ुदा की...


अब तो मेरे ख़ुदा - Ab To Mere Khuda (Jagjit Singh, Chitra Singh, Ghazal)



Movie/Album: चिराग (1993)
Music By: जगजीत सिंह
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

अब तो मेरे ख़ुदा जलवा दिखाईये
अपने नमाज़ियों का कहा मान जाईये
अब तो मेरे ख़ुदा...

कुछ कह रहीं हैं आपसे सीने की धड़कनें
मेरा नहीं तो दिल का कहा मान जाईये
अपने नमाज़ियों का...

मैं जानता हूँ तू बड़ा रहमत-नवाज़ है
सबके दिलों पे रहम का जादू जगाईये
अपने नमाज़ियों का...

मुद्दत से तिशनगी है तुम्हारे जमाल की
नूर-ए-कमाल से ज़रा पर्दा हटाईये
अपने नमाज़ियों का...


तुम पास आ रहे हो - Tum Paas Aa Rahe Ho (Jagjit Singh, Lata Mangeshkar, Veer Zaara)



Movie/Album: वीर ज़ारा (2004)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

धीरे, धीरे, धीरे, धीरे
आँखों में छा रहे हो
तुम पास आ रहे हो
चुपके, चुपके, चुपके, चुपके
दिल में समा रहे हो
तुम पास आ रहे हो
धीरे, धीरे
चुपके, चुपके

झुकती हुई ये पलकें, खुलते हुए ये गेसू
ये शरम की अदाएँ, वो शोखियों का जादू
कैसे, कैसे, कैसे कैसे
सपने दिखा रहे हो
तुम पास आ रहे हो...

फूलों भरे नज़ारे, ये खुशबुओं के डेरे
लगते हैं ख्वाब जैसे, ये शाम ये सवेरे
हौले, हौले, हौले, हौले
अरमां जगा रहे हो
तुम पास आ रहे हो...


कहीं कहीं से हर चहरा - Kahin Kahin Se Har Chehra (Jagjit Singh, Asha Bhosle, Lata Mangeshkar, Ghazal)



Movie/Album: दिल कहीं होश कहीं (2006)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर, आशा भोसले

कहीं-कहीं से हर चेहरा
तुम जैसा लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है

ऐसा भी एक रंग है
जो करता है बातें भी
जो भी इसको पहन ले वो
अपना सा लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन
कभी-कभी यूँ ही चलता फिरता शहर
अचानक, अचानक तन्हाँ लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...

अब भी यूँ मिलते हैं
हमसे फ़ूल चमेली के
जैसे इनसे अपना कोई
रिश्ता लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...


मेरे जैसे बन जाओगे - Mere Jaise Ban Jaaoge (Jagjit Singh, Chitra Singh, Ghazal)



Movie/Album: एक्सटेसीज़ (1984)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: सईद राही
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

मेरे जैसे बन जाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से टकराओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे...

हर बात गँवारा कर लोगे
मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीज़ें भी बँधवाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

तन्हाई के झूले झूलोगे
हर बात पुरानी भूलोगे
आइने से तुम घबराओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

जब सूरज भी खो जायेगा
और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

बेचैनी जब बढ़ जायेगी
और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे...


मैं भूल जाऊँ तुम्हें - Main Bhool Jaaoon Tumhein (Jagjit Singh, Silsilay)



Movie/Album: सिलसिले (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

मैं भूल जाऊँ तुम्हें
अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ
तो किस तरह भूलूँ
कि तुम तो फ़िर भी हकीकत हो
कोई ख्वाब नहीं

यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँ, कमबख़्त
भुला सका ना ये वो सिलसिला, जो था भी नहीं
वो इक ख्याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हममें कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं
अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए
तुम्हें भुलाना भी चाहूँ...


जब सामने तुम आ जाते हो - Jab Saamne Tum Aa Jaate Ho (Jagjit Singh, Asha Bhosle)



Movie/Album: दिल कहीं होश कहीं (2006)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, आशा भोसले

आइना देख के बोले ये सँवरने वाले
अब तो बे-मौत मरेंगे मेरे मरने वाले

देख के तुमको होश में आना भूल गये
याद रहे तुम और ज़माना भूल गये
जब सामने तुम आ जाते हो
क्या जानिए क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है, कुछ खो जाता है
क्या जानिए क्या हो जाता है

चाहा था ये कहेंगे, सोचा था वो कहेंगे
आए वो सामने तो, कुछ भी ना कह सके
बस देखा किये उन्हें हम

देखकर तुमको यकीं होता है
कोई इतना भी हसीं होता है
देख पाते हैं कहाँ हम तुमको
दिल कहीं होश कहीं होता है
जब सामने तुम...

आकर चले न जाना, ऐसे नहीं सताना
देकर हँसी लबों को, आँखों को मत रुलाना
देना ना बेकरारी दिल का करार बन के
यादों में खो ना जाना, तुम इंतज़ार बन के
इंतज़ार बन के

भूलकर तुमको न जी पाएँगे
साथ तुम होगी जहाँ जाएँगे
हम कोई वक़्त नहीं हैं हमदम
जब बुलाओगे चले आएँगे
जब सामने तुम...


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