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पहला नशा पहला खुमार - Pehla Nasha Pehla Khumar (Jo Jeeta Wohi Sikander, Udit Narayan, Sadhna Sargam)



Movie/Album: जो जीता वही सिकंदर (1992)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, साधना सरगम

पहला नशा, पहला खुमार
नया प्यार है नया इंतज़ार
कर लूँ मैं क्या अपना हाल
ऐ दिल-ए-बेक़रार
मेरे दिल-ए-बेक़रार तू ही बता

उड़ता ही फिरूँ इन हवाओं में कहीं
या मैं झूल जाऊँ, इन घटाओं में कहीं
एक कर लूँ आसमान और ज़मीन
अब यारो क्या करूँ, क्या नहीं
पहला नशा, पहला खुमार...

उसने बात की, कुछ ऐसे ढंग से
सपने दे गया वो हज़ारों रंग के
रह जाऊँ जैसे में हार के
और चूमे वो मुझे प्यार से
पहला नशा, पहला खुमार...


जवाँ हो यारों - Jawaan Ho Yaaron (Udit Narayan, Jo Jeeta Wohi Sikander)



Movie/Album: जो जीता वही सिकंदर (1992)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, विजयता

जवाँ हो यारों ये तुमको हुआ क्या
अजी हमको देखो ज़रा
ये माना अभी हैं खाली हाथ
न होंगे सदा यही दिन रात
कभी तो बनेगी अपनी बात
अरे यारों, मेरे प्यारों, मेरी मानों, हो दिलदारों
जवां हो यारों...

मेहनत से मिले जो उसपे गुज़ार
दूजे के माल को ठोकर से मार
आएगी इधर भी एक दिन बहार
होगा ये ज़माना हमपे निसार
ये माना अभी हैं खाली...

इसको छूना नहीं हे राम राम
ये तो है पाप की गठरी तमाम
कब ये रुत बदल जाए किसको खबर
लग जाए हमें भी सोने के पर
फिर ऐसे उड़ेंगे हम सब यार
गुलों से लदेगी मोटर कार
हसीना होगी गले का हार
अरे यारों मेरे प्यारों...


यहाँ के हम सिकंदर - Yahan Ke Hum Sikandar (Udit, Sadhna, Jo Jeeta Wohi Sikander)



Movie/Album: जो जीता वही सिकंदर (1992)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, साधना सरगम

वो सिकंदर ही दोस्तों कहलाता है
हारी बाज़ी को जीतना जिसे आता है
निकलेंगे मैदान में जिस दिन हम झूम के
धरती डोलेगी ये कदम चूम के
वो सिकंदर ही दोस्तों कहलाता है

जो सब करते हैं यारों, वो क्यों हम तुम करे
यूं ही कसरत करते करते काहे को हम मरे
घरवालों से टीचर से भला हम क्यों डरे
यहाँ के हम सिकंदर
चाहें तो रख ले सबको अपनी जेब के अन्दर
अरे हमसे बचके रहना मेरे यार
नहीं समझे है वो हमें, तो क्या जाता है
हारी बाजी को जीतना हमें आता है

ये गलियाँ अपनी, ये रस्ते अपने
कौन आएगा अपने आगे
राहों में हमसे टकराएगा जो
हट जाएगा वो घबरा के
यहाँ के हम सिकंदर...

ये भोली भाली मतवाली परियाँ
जो हैं अब दौलत पे कुर्बान
जब कीमत दिल की, ये समझेंगी तो
हमपे छिड़केंगी अपनी जान
यहाँ के हम सिकंदर
चाहे तो रख ले सबको अपनी जेब के अन्दर
अरे हमभी है शहज़ादे गुलफ़ाम...


रूठ के हमसे कहीं - Rooth Ke Humse Kahin (Jatin, Jo Jeeta Wohi Sikander)



Movie/Album: जो जीता वोही सिकंदर (1992)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: जतिन पंडित

रूठ के हमसे कहीं
जब चले जाओगे तुम
ये ना सोचा था कभी
इतने याद आओगे तुम
रूठ के हमसे कहीं...

मैं तो ना चला था दो कदम भी तुम बिन
फिर भी मेरा बचपन यही समझा हर दिन
छोड़ के मुझे भला अब कहाँ जाओगे तुम
ये ना सोचा था...

बातों कभी हाथों से भी मारा है तुम्हें
सदा यही कह के ही पुकारा है तुम्हें
क्या कर लोगे मेरा जो बिगड़ जाओगे तुम
ये ना सोचा था...

देखो मेरे आँसू, यही करते हैं पुकार
आओ चले आओ, मेरे भाई मेरे यार
पोंछने आँसू मेरे क्या नहीं आओगे तुम
ये ना सोचा था...


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