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कभी कभी मेरे दिल में - Kabhi Kabhi Mere Dil Mein (Mukesh, Kabhie Kabhie)



Movie/Album: कभी कभी (1976)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: मुकेश, लता मंगेशकर

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिये
तू अब से पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिये
कभी कभी मेरे दिल में...

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के ये बदन, ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव है मेरी ख़ातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं
कभी कभी मेरे दिल में...

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे बजती हैं शहनाइयां सी राहों में
सुहाग रात है, घूँघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है, तू शरमा के अपनी बाहों में
कभी कभी मेरे दिल में...

कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूँ ही
उठेगी मेरी तरफ़ प्यार की नज़र यूँ ही
मैं जानता हूँ के तू ग़ैर है, मगर यूँ ही
कभी कभी मेरे दिल में...


मैं पल दो पल का - Main Pal Do Pal Ka (Mukesh, Kabhie Kabhie)



Movie/Album: कभी कभी (1976)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: मुकेश

मैं पल दो पल का शायर हूँ
पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है
पल दो पल मेरी जवानी है
मैं पल दो पल का...

मुझसे पहले कितने शायर
आए और आकर चले गए
कुछ आहें भर कर लौट गए
कुछ नग़मे गाकर चले गए
वो भी एक पल का किस्सा थे
मैं भी एक पल का किस्सा हूँ
कल तुमसे जुदा हो जाऊँगा
वो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ
मैं पल दो पल का...

कल और आएंगे नग़मों की
खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझसे बेहतर कहने वाले
तुमसे बेहतर सुनने वाले
कल कोई मुझको याद करे
क्यूँ कोई मुझको याद करे
मसरूफ़ ज़माना मेरे लिये
क्यूँ वक़्त अपना बरबाद करे
मैं पल दो पल का...


तेरे चेहरे से नज़र नहीं - Tere Chehre Se Nazar Nahin (Kishore, Lata, Kabhie Kabhie)



Movie/Album: कभी कभी (1976)
Music By: खैय्याम
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: किशोर कुमार, लता मंगेशकर

तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती
नज़ारे हम क्या देखें
तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती
नज़ारे हम क्या देखें

पिघले बदन तेरी तपती निगाहों से
शोलों की आँच आए बर्फ़ीली राहों से
लगे कदमों से आग लिपटती
नज़ारे हम क्या देखें...

रंगों की बरखा है खुशबू का साथ है
किसको पता है अब दिन है कि रात है
लगे दुनिया ही आज सिमटती
नज़ारे हम क्या देखें...

पलकों पे फैला तेरी पलकों का साया है
चेहरे ने तेरे मेरा चेहरा छुपाया है
तेरे जलवों की धुँध नहीं छँटती
नज़ारे हम क्या देखें...


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