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आई अब की साल दिवाली - Aayi Ab Ki Saal Diwali (Lata Mangeshkar, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

आई अब की साल दिवाली
मुंह पर अपने खून मले
चारों तरफ है घोर अंधेरा
घर में कैसे दीप जले
आई अब की साल दिवाली...

बालक तरसे फुलझड़ियों को, दीपों को दीवारें
माँ की गोदी सूनी सूनी, आँगन कैसे संवारे
राह में उनकी जाओ उजालों
बन में जिनकी शाम ढले
आई अब की साल दिवाली...

जिनके दम से जगमग जगमग करती थी ये रातें
चोरी चोरी हो जाती थी मन से मन की बातें
छोड़ चले वो घर में अमावस
ज्योति लेकर साथ चले
आई अब की साल दिवाली...

टप-टप टप-टप टपके आंसू, छलकी खाली थाली
जाने क्या क्या समझाती है आँखों की ये लाली
शोर मचा है आग लगी है
कटते हैं पर्वत पे गले
आई अब की साल दिवाली...


ये माना मेरी जाँ - Ye Maana Meri Jaan (Md.Rafi, Hanste Zakhm)



Movie/Album: हँसते ज़ख्म (1973)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मो.रफ़ी

तौबा तौबा ये जवानी का गुरूर
इश्क के सामने फिर भी सर झुकाना ही पड़ा
कैसे कहते थे न आएँगे
मगर दिल ने इस तरह पुकारा
तुम्हें आना ही पड़ा

ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है
वो इक बेकरारी जो अब तक इधर थी
वो ही बेकरारी उधर किसलिए है
अभी तक तो इधर थी उधर किसलिए है

बहलना न जाने, बदलना न जाने
तमन्ना मचल के संभालना न जाने
करीब और आओ, कदम तो बढ़ाओ
झुका दूं न मैं सर तो, सर किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...

नज़ारे भी देखे, इशारे भी देखे
कई खूबसूरत सहारे भी देखे
नाम क्या चीज़ है, इज्ज़त क्या है
सोने चांदी की हकीकत क्या है
लाख बहलाए कोई दौलत से
प्यार के सामने दौलत क्या है
जो मैखाने जा के, मैं सागर उठाऊं
तो फिर ये नशीली नज़र किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...

तुम्हीं ने संवारा, तुम्हीं ने सजाया
मेरे सूने दिल को तुम्हीं ने बसाया
जिस चमन से भी तुम गुजार जाओ
हर कली पर निखार आ जाये
रूठो जाओ तो रूठ जाये खुदा
और जो हँस दो, बहार आ जाये
तुम्हारे कदम से है घर में उजाला
अगर तुम नहीं तो ये घर किसलिए है
ये माना मेरी जाँ...


आज सोचा तो आँसू भर आए - Aaj Socha To Aansoo Bhar Aaye (Lata Mangeshkar, Hanste Zakhm)



Movie/Album: हँसते ज़ख्म (1973)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

आज सोचा तो आंसू भर आए
मुद्दतें हों गई मुस्कुराये

हर कदम पर उधर मुड़कर देखा
उनकी महफिल से हम उठ तो आए
आज सोचा तो आंसू...

रह गई ज़िन्दगी दर्द बन के
दर्द दिल में छुपाये छुपाये
आज सोचा तो आंसू...

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं
याद इतना भी कोई न आए
आज सोचा तो आंसू...


मिलो न तुम तो - Milo Na Tum To (Lata Mangeshkar, Heer Ranjha)



Movie/Album: हीर राँझा (1970)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

मिलो न तुम तो हम घबराएं
मिलो तो आँख चुराएं
हमें क्या हो गया है
तुम्हीं को दिल का राज़ बतायें
तुम्हीं से राज़ छुपायें
हमें क्या हो गया है...

ओ भोले साथिया
देखे जो शोखी तेरे प्यार की
आँचल में भर ली हमने
सारी बहारें संसार की
नयी अदा से हम इठलायें
पायी खुशी लुटायें
हमें क्या हो गया है...

रूठे कभी कभी मान गये
बातें तुम्हारी हम जान गये
ऐसी अदायें क़ुरबान गये
तुम्हें मनाये दिल बहलायें
क्या क्या नाज़ उठायें
हमें क्या हो गया है   ...

ओ सोहने जोगिया
रंग ले हमें भी इसी रंग में
फिर से सुना दे बंसी
कलियाँ खिला दे गोरे अंग में
वही जो तानें आग लगाये
उन्हीं से आग बुझाएं
हमें क्या हो गया है...


मिले न फूल तो काँटों से - Mile Na Phool To Kaanton Se (Md.Rafi, Anokhi Raat)



Movie/Album: अनोखी रात (1968)
Music By: रोशन
 Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मो.रफ़ी

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर हमने ज़िंदगी कर ली

अब आगे जो भी हो अंजाम, देखा जाएगा
ख़ुदा तलाश लिया और बंदगी कर ली
मिले न फूल तो...

नज़र मिली भी न थी और उनको देख लिया
ज़बां खुली भी न थी और बात भी कर ली
मिले न फूल तो...

वो जिनको प्यार है चांदी से, इश्क़ सोने से
वही कहेंगे कभी हमने ख़ुदकशी कर ली
मिले न फूल तो...


चलते चलते यूँ ही कोई - Chalte Chalte Yun Hi Koi (Lata Mangeshkar, Pakeezah)



Movie/Album: पाकीज़ा (1971)
Music By: गुलाम मोहम्मद
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

चलते चलते यूँ ही कोई मिल गया था
सरे राह चलते चलते
वहीँ थम के रह गयी है, मेरी रात ढलते ढलते

जो कही गई ना मुझसे, वो ज़माना कह रहा है
के फ़साना बन गयी है, मेरी बात चलते चलते
यूँ ही कोई मिल...

शब-ए-इंतज़ार आखिर, कभी होगी मुख़्तसर भी
ये चिराग बुझ रहे हैं, मेरे साथ जलते जलते
यूँ ही कोई मिल...


तुम्हारे ज़ुल्फ़ के साए में - Tumhari Zulf Ke Saaye Mein (Md.Rafi, Naunihal)



Movie/Album: नौनिहाल (1967)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मो.रफ़ी

तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा

नज़र मिलाई तो पूछूंगा इश्क का अंजाम
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में...

जहान-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हें मुबारक हो
रही शिकस्त तो वो अपने नाम कर लूँगा
तुम्हारी जुल्फ के साये में...


कोई ये कैसे बताए - Koi Ye Kaise Bataye (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1983)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: जगजीत सिंह

कोई ये कैसे बताये के वो तन्हाँ क्यों है
वो जो अपना था, वही और किसी का क्यों है
यही दुनिया है तो फिर, ऐसी ये दुनिया क्यों है
यही होता है तो, आख़िर यही होता क्यों है

इक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ लें दामन
उसके सीने में समा जाए, हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत है तो फिर, फासला इतना क्यों है

दिल-ए-बरबाद से निकला नहीं अब तक कोई
इक लुटे घर पे दिया करता है दस्तक कोई
आस जो टूट गयी, फिर से बंधाता क्यों है

तुम मसर्रत का कहो या इसे ग़म का रिश्ता
कहते हैं प्यार का रिश्ता है जनम का रिश्ता
है जनम का जो ये रिश्ता तो बदलता क्यों है


झुकी झुकी सी नज़र - Jhuki Jhuki Si Nazar (Jagjit Singh, Arth)



Movie/Album: अर्थ (1982)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed by: जगजीत सिंह

झुकी-झुकी सी नज़र
बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही
दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

वो पल के जिसमें मोहब्बत जवान होती है
उस एक पल का तुझे इंतज़ार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...


मेरे दिल में तू ही तू है - Mere Dil Mein Tu Hi Tu Hai (Jagjit Singh, Chitra Singh, Bhavna)



Movie/Album: भावना (1996)
Music By: बप्पी लहरी
Lyrics By: कैफ़ी अज्मी
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

मेरे दिल में तू ही तू है
दिल की दवा क्या करूँ
दिल भी तू है, जाँ भी तू है
तुझ पे फ़िदा क्या करूँ
मेरे दिल में तू...

खुद को खो के, तुझको पा कर
क्या-क्या मिला क्या कहूँ
तेरी हो के जीने में क्या
आया मज़ा क्या कहूँ
कैसे दिन हैं, कैसी रातें
कैसी फिज़ा क्या कहूँ
मेरी हो के तूने मुझको
क्या-क्या दिया क्या कहूँ
मेरे पहलू में जब तू है
फिर मैं दुआ क्या करूँ
दिल भी तू है...

है ये दुनिया, दिल की दुनिया
मिल के रहेंगे यहाँ
लूटेंगे हम खुशियाँ हर पल
दुख ना सहेंगे यहाँ
अरमानों के चंचल धारें
ऐसे बहेंगे यहाँ
ये तो सपनों की जन्नत है
सब ही कहेंगे यहाँ
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है
दिल से जुदा क्या करूँ
दिल भी तू है...


मैं ये सोच कर - Main Ye Soch Kar (Md.Rafi, Haqeeqat)



Movie/Album: हक़ीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था
के वो रोक लेगी, मना लेगी मुझको

हवाओं में लहराता आता था दामन
के दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको

कदम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे
के आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको

मगर उसने रोका, न उसने मनाया
न दामन ही पकड़ा, न मुझको बिठाया

न आवाज़ ही दी, न वापस बुलाया
मैं आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही आया

यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं...


खेलो ना मेरे दिल से - Khelo Na Mere Dil Se (Lata Mangeshkar, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: लता मंगेशकर

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना
खेलो ना मेरे दिल से...

मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किस लिये निगाह में
मंज़िल अपनी तुम अलग बसाओगे
मुझको छोड़ दोगे राह में
प्यार क्या दिल्लगी
प्यार क्या खेल है
खेलो ना मेरे दिल से...

क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ
क्यूँ मिले थे ज़िन्दगी के मोड़ पर
मुझको आसरा दिया था क्यूँ
प्यार क्या दिल्लगी...


मस्ती में छेड़ के तराना - Masti Main Ched Ke Tarana (Md.Rafi, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Lyrics By: मदन मोहन
Music By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

मस्ती में छेड़ के तराना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

प्यार बहलता नहीं बहलाने से
लो मैं चमन को चला वीराने से
शमा है कब से जुदा परवाने से
अश्क़ थमेंगे नज़र मिल जाने से
दिल से मिलेगा दीवाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

मिल के वो पहले बहुत शर्माएगी
आगे बढ़ेगी मगर रुक जाएगी
हो के करीब कभी घबराएगी
और करीब कभी खिंच आएगी
खेल नहीं है मनाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...

मुखड़े से ज़ुल्फ़ ज़रा सरकाऊँगा
सुलझेगा प्यार उलझ मैं जाऊँगा
पा के भी हाय बहुत पछताऊँगा
ऐसा सुक़ून कहाँ फिर पाऊँगा
और नहीं है ठिकाना कोई दिल का
आज लुटायेगा खज़ाना कोई दिल का
मस्ती में छेड़ के तराना...


होके मजबूर मुझे - Hoke Majboor Mujhe (Md.Rafi, Manna Dey, Talat Mahmood, Bhupinder Singh, Haqeeqat)



Movie/Album: हकीकत (1964)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद, भूपिंदर सिंह, मन्ना डे

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके से दवा जान के खाया होगा
होके मजबूर मुझे...

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिये और ना बहाए होंगे
बन्द कमरे में जो ख़त मेरे जलाए होंगे
एक इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा
होके मजबूर मुझे...

उसने घबरा के नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ़ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा
होके मजबूर मुझे...

छेड़ की बात पे अरमां मचल आए होंगे
ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आए होंगे
सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा
होके मजबूर मुझे...

ज़ुल्फ़ ज़िद कर के किसी ने जो बनाई होगी
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी
बिजली नज़रों ने कई दिन ना गिराई होगी
रंग चहरे पे कई रोज़ न आया होगा
होके मजबूर मुझे...


आने वाला कल - Aane Wala Kal (Kumar Sanu, Anu Malik, Phir Teri Kahani Yaad Aayee)



Movie/Album: फिर तेरी कहानी याद आयी (1993)
Music By: अनु मलिक
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed By: कुमार सानू, अनु मलिक

आने वाला कल इक सपना हैगुज़रा हुआ कल बस अपना है
हम गुज़रे कल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
आने वाला कल...

दामन सी सकते हैं जो
ज़ख्मों को सीना जानते हो
जीना उनका जीना जो
यादों में जीना जानते हो
जिन तारों को रातों में
उठ-उठ के गगन में ढूंढते हो
जिन कलियों को, फूलों को
जा-जा के चमन में ढूंढते हो
वो फूल वो कलियाँ वो तारे आँचल में रहते हैं
हम प्यार की बिजली ले कर बादल में रहते हैं
आने वाला कल...

मेरे तन-मन के अरमां
अपने तन-मन से पूछो
इनकी छुन-छुन का मतलब
दिल की धड़कन से पूछो
दुनिया सारे ज़माने ले ले
दौलत ले ले, खज़ाने ले ले
लूट सके ना जिसको ज़माना
हमको एक पल ऐसा दे दे
प्यार के रंगीन मौसम सब जिस पल में रहते हैं
वक्त के सच्चे नगमें जिस पल में रहते हैं
आने वाला कल...


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