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दिल तड़प तड़प के - Dil Tadap Tadap Ke (Lata Mangeshkar, Mukesh, Madhumati)



Movie/Album: मधुमती (1958)
Music By: सलिल चौधरी
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: लता मंगेशकर, मुकेश

दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
तू हमसे आँख ना चुरा, तुझे कसम है आ भी जा

तू नहीं तो ये बहार क्या बहार है
गुल नहीं खिले के तेरा इंतजार है
दिल तड़प तड़प के...

दिल धड़क धड़क के दे रहा है ये सदा
तुम्हारी हो चुकी हूँ मैं, तुम्हारे पास हूँ सदा

तुमसे मेरी ज़िन्दगी का ये सिंगार है
जी रही हूँ मैं के मुझको तुमसे प्यार है
दिल तड़प तड़प के...

मुस्कुराते प्यार का असर है हर कहीं
हम कहाँ हैं, दिल किधर है, कुछ खबर नहीं
दिल तड़प तड़प के...


जंगल में मोर नाचा - Jangal Mein More Nacha (Md.Rafi, Madhumati)



Movie/Album: मधुमती (1958)
Music By: सलिल चौधरी
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

जंगल में मोर नाचा
किसी ने ना देखा हाय
हम जो थोड़ी-सी पी के ज़रा झूमे
हाय रे सबने देखा
जंगल में मोर नाचा...

गोरी की गोल-गोल अँखियाँ शराबी
कर चुकी हैं कैसे-कैसों की खराबी
इनका ये ज़ोर ज़ुल्म किसी ने ना देखा
हम जो थोड़ी सी...

किसी को हरे-हरे नोट का नशा है
किसी को बूट-सूट कोट का नशा है
यारों हमें तो नौ टांक का नशा है
हम जो थोड़ी सी...


ज़ुल्मी संग आँख लड़ी - Zulmi Sang Aankh Ladi (Lata Mangeshkar, Madhumati)



Movie/Album: मधुमती (1958)
Music By: सलिल चौधरी
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed by: लता मंगेशकर

ज़ुल्मी संग आँख लड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहुँ री
ए सखी का से कहुँ
जाने कैसी ये रात बड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे...

वो छुप-छुप के बन्सरी बजाये
सुनाये मोहर मस्ती में डूबा हुआ राग रे
मोहे तारों की छाँव में बुलाये
चुराए मेरी निंदिया, मैं रह जाऊँ जाग रे
लगे दिन छोटा, रात बड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी...

बातों-बातों में रोग बढ़ा जाये
हमारा जिया तड़पे किसी के लिए शाम से
मेरा पागलपना तो कोई देखो
पुकारूँ में चंदा को साजन के नाम से
फिरी मन पे जादू की छड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी...


चढ़ गयो पापी बिछुआ - Chadh Gayo Paapi Bichhua (Lata Mangeshkar, Manna Dey, Madhumati)



Movie/Album: मधुमती (1958)
Music By: सलिल चौधरी
Lyrics By: शैलेन्द्र
Performed By: लता मंगेशकर, मन्ना डे

ओ बिछुआ, हाय रे
पीपल छैयाँ, बैठी पल-भर
हो भर के गगरिया हाय रे

होये होये होये
दैय्या रे, दैय्या रे
चढ़ गया पापी बिछुआ
हाय हाय रे मर गयी
कोई उतारो बिछुआ
दैय्या रे दैय्या रे...

कैसो-रो पापी बिछुआ, बिछुआ
दैय्या रे दैय्या रे...

मंतर फेरूँ, कोमल काया
छोड़ के जारे छू
जा रे, जा रे, जा रे
और भी चढ़ गयो
न गयो पापी बिछुआ
कैसी ये आग लगा गयो, पापी बिछुआ
हो सारे बदन पे छा गयो, पापी बिछुआ
कैसो रे पापी बिछुआ, बिछुआ
दैय्या रे दैय्या रे...

मंतर झूठा, वैद्य भी झूठा
पिया घर आ रे, आ रे, आ रे, आ रे
ओये ओये ओये
देखो रे, देखो रे, देखो उतर गयो बिछुआ
टूट के रह गयो डंक, उतर गयो बिछुआ
सैयाँ को देख के जाने किधर गयो बिछुआ
कैसो रे पापी बिछुआ, बिछुआ
दैय्या रे दैय्या रे...


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