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आग लगे उस आग को - Aag Lage Us Aag Ko (Karsan Sargathiya, Mausam)



Movie/Album: मौसम (2011)
Music By: प्रीतम चक्रवर्ती
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: करसन सरगाथिया

हे आग लगे उस आग को
मन भी तरजो बले
हर दिन बले पलछिन बले
पर तेरी याद ना जले
हो हुआ हला ओ हुआ हला
ओ जग बला हाय जग बला

हे छोड़े से भी ना छूटे फिर भी तकदीरें
फिर अकड़पन तीर चले चल चलती लकीरें
हटती से हटती ना ये तड़पन बिन तेरे
धज्जी-धज्जी लाख मेरी दे रंग सवेरे
रंगीले रंग रसिया मेरे
सभी थे मेरे रंग-संग तेरे

हे ऐसे नौबत हर इक हसरत और मोहब्बत ख़ाक हुई
मीठी-मीठी बनती बन-बन मीठी थी
सारी इज्ज़त ख़ाक हुई
उतरा मुखड़ा दिल का दुखड़ा, सुलगे आग लगे डाले
ओ वो नैना बिन काजल के
हो गए कोयले से काले, हो गए कोयले से काले
हो गए कोयले से काले
रंगीले रंग रसिया मेरे
सभी थे मेरे रंग-संग तेरे
रंगीले रंग रसिया मेरे...


पूरे से ज़रा सा - Poore Se Zara Sa (Karsan Sargathiya, Mausam)



Movie/Album: मौसम (2011)
Music By: प्रीतम चक्रवर्ती
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: करसन दास सरगाथिया

पूरे से ज़रा सा कम हैं
तेरा मेरा होना तो है
तेरे मेरे होने से
तू फिज़ा हमारी, हम मौसम हैं
तू नदी है, किनारा तेरा हम हैं
हाँ धारा तेरा हम हैं
बिन तेरे हम तो
पूरे से ज़रा सा कम हैं...

तेरे बिन पाना क्या है
तेरे बिन खोना क्या
तू मेरा मसीहा, तू ही महरम है
तू नज़र है नज़ारा तेरा हम हैं
इशारा तेरा हम हैं
बिन तेरे हम तो
पूरे से ज़रा सा कम हैं...


इक तू ही तू - Ik Tu Hi Tu (Hans Raj Hans, Shahid Mallya, Wadali Brothes, Mausam)



Movie/Album: मौसम (2011)
Music By: प्रीतम चक्रवर्ती
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: हंस राज हंस, शाहिद माल्या, वडाली ब्रदर्स

तेरा शहर जो पीछे छूट रहा
कुछ अंदर-अंदर टूट रहा
हैरान हैं मेरे दो नैना
ये झरना कहाँ से फूट रहा
जब-जब चाहा तूने रज्ज के रुलाया
जब-जब चाहा तूने खुल के हँसाया
जब-जब चाहा तूने खुद में मिलाया
इक तू ही तू ही तू ही तू ही तू ही

मेंडा तो है रब खो गया
मेंडा तो है सब खो गया
तेरियाँ मोहब्बताँ ने लुट्टी-पुट्टी साईयाँ
तेरियाँ मोहब्बता ने सच्चेयाँ सताईयाँ
खाली हाथ मोड़ी ना तू, खाली हाथ आईयाँ
मेंडा तो है रब खो गया
मेंडा तो है हाए सब खो गया
जब-जब चाहा तूने रज्ज के रुलाया...

काँच पे चलना, आँच में जलना
जितने भी दर्द हैं माये
सह ना सके ये जिंदड़ी
ज़हर को पी के, सूली पे जी के
निकले जो दम कभी
तो इन दर्दों से छूटे जिंदड़ी
यूँ वक्त कटे मेरी जान घटे
अरमान सभी टुकड़ों में बँटे
तेरियाँ जुदाईयाँ अग्गे दुःख सारे छोटे
तेरियाँ जुदाईयाँ अग्गे सुख सारे खोटे
पल-पल होते मेरे दिल दे टोटे
मेंडा तो है हाय

दिल की गागर से, सात सागर से
छलके हैं तो क्यों ये
पाँचों दरिया भी हैराँ हो गए
साज़ तन-मन के, सोने से खनके
साथ मेरे था जब मेरा
अब तो ये वीराँ हो गए
तेरे गम को मिटावाँ, कैसे तुझको भुलावाँ
कैसे लगियाँ निभावाँ, कैसे बिछड़े को पावाँ कैसे
तेरियाँ मोहब्बताँ ने हक़ भी दिए हैं
तेरियाँ मोहब्बताँ ने दुःख भी दिए हैं
तेरे बिना लख वारी मर के जिए हैं
मेंडा तो है, रब खो गया
जब-जब चाहा तूने रज्ज के रुलाया...


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