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चुपके से सुन - Chupke Se Sun (Alka Yagnik, Udit Narayan, Mission Kashmir)



Movie/Album: मिशन कश्मीर (2000)
Music By: शंकर एहसान लॉय
Lyrics By: समीर
Performed By: अलका याग्निक, उदित नारायण

चुपके से सुन इस पल की धुन
इस पल में जीवन सारा
सपनों की है दुनिया यही
मेरी आँखों से देखो ज़रा

गहरा धुआँ छटने लगा कोहरे छंटे
देखो चारों तरफ़ अब नूर है जन्नत का
उजली ज़मीं, नीला गगन
पानी पे बहता शिकारा
सपनों की है दुनिया यही
तेरी आँखों से मैंने देखा
चुपके से सुन...

आशा के पर लगे पंछी बनके मैं उड़ी
जिनकी थी आरज़ू, उन राहों से मैं जुड़ी
कुछ पा गई, कुछ खो गया, जाने मुझे क्या हो गया
जागी-जागी, सोई-सोई, रहती हूँ खोई-खोई
मेरी बेकरारी कोई, जाने ना, जाने ना
रुत है दीवानी बड़ी, छेड़े मुझे घड़ी-घड़ी
ऐसे में अनाड़ी दिल माने ना माने ना
सपनों की है दुनिया...

मौसम का हो गया जाने कैसा ये असर
चेहरे से अब तेरे हटती नहीं मेरी नज़र
कोई कहीं ना पास है, बस प्यार का एहसास है
खुश्बू का झोंका आए, हमें महका के जाए
हमको न कुछ भी खबर है, खबर है
दूर शहनाई बजी, यादों की दुल्हन सजी
सीने पे तुम्हारे मेरा, सर है, सर है
सपनों की है दुनिया...


सोचो के झीलों का शहर हो - Socho Ke Jheelon Ka Sheher Ho (Udit, Alka, Mission Kashmir)



Movie/Album: मिशन कश्मीर (2000)
Music By: शंकर एहसान लॉय
Lyrics By: समीर
Performed By: उदित नारायण, अलका याग्निक

देखो देखो, क्या मैं देखूँ
सोचो सोचो, सोचूँ मैं क्या ओ ओ

सोचो के झीलों का शहर हो
लहरों पे अपना एक घर हो
हम जो देखें सपने प्यारे, सच हों सारे
बस और क्या
सोचो के झीलों का...

फ़र्श हो प्यार का, खुश्बूओं की दीवारें
हम जहां बैठ के, प्रेम से दिन गुज़ारें
पलकें उठें, पलकें झुकें
देखे तुझे बस ये नज़र
सोचो के झीलों का...

बुम्बरो बुम्बरो श्याम रंग बुम्बरो
आए हो किस बगिया से तुम?

बर्फ़ ही बर्फ़ हो, सर्दियों का हो मौसम
आग के सामने, हाथ सेकते हों हम
बैठी रहूँ आग़ोश में
रख के तेरे कांधे पे सर
सोचो के झीलों का...


रिंद पोश माल - Rind Posh Maal (Shankar Mahadevan, Mission Kashmir)



Movie/Album: मिशन कश्मीर (2000)
Music By: शंकर एहसान लॉय
Lyrics By: समीर
Performed By: शंकर महादेवन

फिर ज़र्रा-ज़र्रा महकेगा, खुश्बू के मौसम आएँगे
फिर चिनार की शाखों पे, पंछी घर बनाएँगे
इन राहों से जाने वाले, फिर लौट के वापस आएँगे
फिर जन्नत की गलियों में, सब लोग ये नगमा गाएँगे
रिंद पोश माल गिंदने द्राये लो लो
रिंद पोश माल गिंद ने...
सरगम के मीठे मीठे सुर घोलो
रिंद पोश माल गिंद ने...

हे आया हूँ मैं प्यार का ये नगमा सुनाने
सारी दुनिया को इक सुर में सजाने
सबके दिलों से नफ़रतों को मिटाने
आओ यारों मेरे संग संग बोलो
रिंद पोश माल गिंद ने...

जीत ले जो सबके दिल को, ऐसा कोई गीत गाओ
दोस्ती का साज़ छेड़ो, दुश्मनी को भूल जाओ
आओ यारों मेरे संग संग बोलो
रिंद पोश माल गिंद ने...

संगीत में है ऐसी फुहार, पतझड़ में भी जो लाए बहार
संगीत को ना रोके दीवार, संगीत जाए सरहद के पार
हो संगीत माने ना धर्म जात, संगीत से जुड़ी क़ायनात
संगीत की ना कोई ज़ुबान, संगीत में है गीता क़ुरान
संगीत में है अल्लाह-ओ-राम, संगीत में है दुनिया तमाम
तूफ़ानों का भी रुख मोड़ता है, संगीत टूटे दिल को जोड़ता है
रिंद पोश माल गिंद ने...


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