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भँवरे ने खिलाया फूल - Bhanware Ne Khilaya Phool (Lata, Suresh, Prem Rog)



Movie/Album: प्रेम रोग (1982)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: नरेन्द्र शर्मा
Performed By: लता मंगेशकर, सुरेश वाडकर

भँवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राज-कुंवर
भंवरे तू कहना न भूल, फूल तुझे लग जाये मेरी उमर
भँवरे ने खिलाया...

भँवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राज-कुंवर
भंवरे तू कहना न भूल, फूल तेरा हो गया इधर-उधर
भँवरे ने खिलाया...

वो दिन अब ना रहे
क्या-क्या विपदा पड़ी फूल पर कैसे फूल कहे
वो दिन अब ना रहे
होनी थी या वो अनहोनी जाने इसे विधाता
छूटे सब सिंगार गिरा गल-हार टूटा हर नाता
शीश-फूल मिल गया धूल में क्या-क्या दुःख न सहे
वो दिन अब ना रहे
भंवरे तू कहना न भूल, फूल डाली से गया उतर
भँवरे ने खिलाया...

सुख-दुःख आये-जाये
सुख की भूख न दुःख की चिंता, प्रीत जिसे अपनाये
सुख-दुःख आये-जाये
मीरा ने पिया विष का प्याला, विष को भी अमृत कर डाला
प्रेम का ढाई अक्षर पढ़ कर मस्त कबीरा गाये
सुख-दुःख आये-जाये
भंवरे तू कहना न भूल, फूल गुज़रे दिन गए गुज़र
भँवरे ने खिलाया...

फैली-फूली फुलवारी में भंवरा
गुन-गुन गुन-गुन गुन-गुन गुन-गुन गाये
काहे सोवत निंदिया जगाये
लाखों में किसी एक फूल ने लाखों फूल खिलाये
मंद-मंद मुस्काये
हाय काहे सोवत निंदिया जगाये
भंवरे तू कहना ना भूल, फूल तेरा मधुर नहीं मधुकर
भँवरे ने खिलाया...
भँवरे तू कहना ना भूल, फूल मेरा सुन्दर सरल सुघड़
भँवरे ने खिलाया...


मेरी किस्मत में तू नहीं - Meri Qismat Mein Tu Nahin (Suresh Wadkar, Lata Mangeshkar, Prem Rog)



Movie/Album: प्रेम रोग (1982)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: अमीर क़ज़लबाश
Performed By: सुरेश वाडेकर, लता मंगेशकर

मेरी किस्मत में तू नहीं शायद, क्यूँ तेरा इंतज़ार करता हूँ
मैं तुझे कल भी प्यार करता था, मैं तुझे अब भी प्यार करता हूँ
आज समझी हूँ प्यार को शायद, आज मैं तुझ को प्यार करती हूँ
कल मेरा इंतज़ार था तुझ को, आज मैं इंतज़ार करती हूँ

सोचता हूँ कि मेरी आँखों ने, क्यों सजाये थे प्यार के सपने
तुझसे माँगी थी एक खुशी मैंने, तूने ग़म भी नहीं दिये अपने
ज़िंदगी बोझ बन गयी अब तो, अब तो जीता हूँ और न मरता हूँ
मैं तुझे कल भी प्यार...

अब न टूटे ये प्यार के रिश्ते, अब ये रिश्ते संभालने होंगे
मेरी राहों से तुझको कल की तरह, दुःख के काँटे निकालने होंगे
मिल न जाये खुशी के रस्ते में, गम की परछाइयों से डरती हूँ
कल मेरा इंतज़ार था...

दिल नहीं इख्तियार में मेरे, जान जायेगी प्यार में तेरे
तुझसे मिलने की आस है आ जा, मेरी दुनिया उदास है आ जा
प्यार शायद इसी को कहते हैं, हर घड़ी बेक़रार रहता हूँ
रात दिन तेरी याद आती है, रात दिन इंतज़ार करती हूँ
मेरी किस्मत में तू नहीं...


मोहब्बत है क्या चीज़ - Mohabbat Hai Kya Cheez (Suresh Wadkar, Lata Mangeshkar, Prem Rog)



Movie/Album: प्रेम रोग (1982)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: संतोष आनंद
Performed By: सुरेश वाडेकर, लता मंगेशकर

ये दिन क्यूँ निकलता है, ये रात क्यूँ होती है
ये पीड़ कहाँ से उठती है, ये आँख क्यूँ रोती है

मोहब्बत है क्या चीज़
मोहब्बत है क्या चीज़, हमको बताओ
ये किसने शुरू की, हमें भी सुनाओ

शाम तक था एक भँवरा, फूल पर मण्डला रहा
रात होने पर कमल की पंखड़ी में बंद था
क़ैद से छूटा सुबह तो हमने पूछा क्या हुआ
कुछ न बोला, अपनी धुन में बस यही गाता रहा
मोहब्बत है क्या चीज़...

दहकता है बदन कैसे, सुलगती हैं ये साँसें क्यों
ये कैसी आग होती है, पिघलती है ये शम्मां क्यूँ
जल उठी शम्मां तो मचल कर परवाना आ गया
आग के दामन में अपने-आपको लिपटा दिया
हमने पूछा दूसरे की आग में रखा है क्या
कुछ न बोला, अपनी धुन में बस यही गाता रहा
मोहब्बत है क्या चीज़...

नशा होता है कैसा, बहकते हैं क़दम कैसे
नज़र कुछ भी नहीं आता, ये मस्ती कैसी होती है
एक दिन गुज़रे जो हम, मयकदे के मोड़ से
एक मयकश जा रहा था, मय से रिश्ता जोड़ के
हमने पूछा किसलिये तू, उम्र भर पीता रहा
कुछ न बोला, अपनी धुन में बस यही गाता रहा
मोहब्बत है क्या चीज़...


मैं हूँ प्रेम रोगी - Main Hoon Prem Rogi (Suresh Wadkar, Prem Rog)



Movie/Album: प्रेम रोग (1982)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: सन्तोष आनंद
Performed By: सुरेश वाडकर

अरे कुछ नहीं, कुछ नहीं
फिर कुछ नहीं है भाता
जब रोग ये लग जाता
मैं हूँ प्रेम रोगी
मेरी दवा तो कराओ
जाओ जाओ जाओ
किसी वैद्य को बुआओ
मैं हूँ प्रेम रोगी...

कुछ समझा कुछ समझ न पाया
दिल वाले का दिल भर आया
और कभी सोचा जायेगा
क्या कुछ खोया, क्या कुछ पाया
जा तन लागे, वो तन जाने
ऐसी है इस रोग की माया
मेरी इस हालत को नज़र ना लगाओ
ओ जाओ जाओ जाओ
किसी वैद्य को बुआओ
मैं हूँ प्रेम रोगी...

सोच रहा हूँ जग क्या होता
इसमें अगर ये प्यार न होता
मौसम का एहसास न होता
गुल गुलशन गुलज़ार न होता
होने को कुछ भी होता पर
ये सुंदर संसार न होता
मेरे इन ख़यालों में तुम भी डूब जाओ
ओ जाओ जाओ जाओ
किसी वैद्य को बुआओ
मैं हूँ प्रेम रोगी...

यारों है वो क़िस्मत वाला
प्रेम रोग जिसे लग जाता है
सुख-दुःख का उसे होश नहीं है
अपनी लौ में रम जाता है
हर पल ख़ुद ही ख़ुद हँसता है
हर पल ख़ुद ही ख़ुद रोता है
ये रोग लाइलाज सही, फिर भी कुछ कराओ
जाओ जाओ जाओ
मेरे वैद्य को बुआओ
मेरा इलाज कराओ
और नहीं कोई तो मेरे यार को बुलाओ
जाओ जाओ जाओ
मेरे दिलदार को बुलाओ
जाओ जाओ जाओ
मेरे यार को बुलाओ
मैं हूँ प्रेम रोगी...


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