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पापा कहते हैं - Papa Kehte Hain (Udit Narayan, Qayamat Se Qayamat Tak)



Movie/Album: क़यामत से क़यामत तक (1988)
Music By: आनंद मिलिंद
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण

दोस्तों, हमारे लिए कॉलेज का ये आखिरी दिन है
और मैं जानते हूँ कि आने वाली ज़िन्दगी के लिए सभी ने कुछ न कुछ सोच रखा है
और आज मुझे बार बार एक ही ख्याल आ रहा है

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा
बेटा हमारा ऐसा काम करेगा
मगर ये तो, कोई ना जाने
के मेरी मंज़िल, है कहाँ

बैठे हैं मिल के, सब यार अपने
सबके दिलों में, अरमां ये है
वो ज़िन्दगी में, कल क्या बनेगा
हर इक नजर का, सपना ये है
कोई इंजिनियर का काम करेगा
बिज़नस में कोई अपना नाम करेगा
मगर ये तो...

मेरा तो सपना, है एक चेहरा
देखे जो उसको, झूमे बहार
गालों में खिलती, कलियों का मौसम
आँखों में जादू, होठों में प्यार
बन्दा ये खूबसूरत काम करेगा
दिल की दुनिया में अपना नाम करेगा
मेरी नज़र से देखो तो यारों
कि मेरी मंज़िल है कहाँ
पापा कहते हैं...


ग़ज़ब का है दिन - Gazab Ka Hai Din (Alka Yagnik, Udit Narayan, Qayamat Se Qayamat Tak)



Movie/Album: क़यामत से क़यामत तक (1988)
Music By: आनंद मिलिंद
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, अलका याग्निक

ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से
ग़ज़ब का है दिन...

देख लो हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
ये पल फिर कहाँ
और ये मंज़िल फिर कहाँ
ग़ज़ब का है दिन...

क्या कहूँ, मेरा जो हाल है
रात दिन, तुम्हारा खयाल है
फिर भी, जान-ए-जां
मैं कहाँ और तुम कहाँ
ग़ज़ब का है दिन...


ऐ मेरे हमसफ़र - Ae Mere Humsafar (Udit, Alka, Qayamat Se Qayamat Tak)



Movie/Album: क़यामत से क़यामत तक (1988)
Music By: आनंद मिलिंद
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, अलका याग्निक

ऐ मेरे हमसफ़र, एक ज़रा इन्तज़ार
सुन सदाएं, दे रही हैं, मंज़िल प्यार की
ऐ मेरे हमसफ़र...

अब है जुदाई का मौसम, दो पल का मेहमां
कैसे ना जाएगा अंधेरा, क्यूँ ना थमेगा तूफां
कैसे ना मिलेगी, मंजिल प्यार की
ऐ मेरे हमसफ़र...

प्यार ने जहाँ पे रखा है, झूम के कदम इक बार
वहीं से खुला है कोई रस्ता, वहीं से गिरी है दीवार
रोके कब रुकी है, मंज़िल प्यार की
ऐ मेरे हमसफ़र...


अकेले हैं तो क्या गम है - Akele Hain To Kya Gham Hai (Udit Narayan, Alka Yagnik)



Movie/Album: क़यामत से क़यामत तक (1988)
Music By: आनंद मिलिंद
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: उदित नारायण, अलका याग्निक

अकेले हैं, तो क्या ग़म है
चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं
बस इक ज़रा, साथ हो तेरा
तेरे तो हैं हम, कब से सनम
अकेले हैं...

अब ये नहीं सपना, ये सब है अपना
ये जहाँ, प्यार का
छोटा सा ये आशियाँ बहार का
बस इक ज़रा...

फिर नहीं टूटेगा, हम पे कोई तूफां
साजना, देखना
हर तूफ़ां का मैं करूंगी सामना
बस इक ज़रा...

अब तो मेरे साजन बीतेगा हर दिन
प्यार की, बाहों में
रंग जाएगी रुत तेरी अदाओं में
बस इक ज़रा...


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