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ये जो पब्लिक है - Ye Jo Public Hai (Kishore Kumar, Roti)



Movie/Album: रोटी (1974)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: किशोर कुमार

ऐ बाबू ये पब्लिक है पब्लिक
ये जो पब्लिक है सब जानती है
पब्लिक है..
अजी अंदर क्या है, अजी बाहर क्या है
ये सब कुछ पहचानती है
पब्लिक है..

ये चाहे तो सर पे बिठा ले, चाहे फेंक दे नीचे
पहले ये पीछे भागे, फिर भागो इसके पीछे
अरे दिल टूटे तो, अरे ये रूठे तो
तौबा कहाँ फिर मानती है
ये जो पब्लिक है...

क्या नेता, क्या अभिनेता, दे जनता को जो धोखा
पल में शोहरत उड़ जाये, ज्यों एक पवन का झौंका
अरे ज़ोर ना करना, अरे शोर ना करना
अपने शहर में शांति है
ये जो पब्लिक है...

हीरे-मोती तुमने छुपाये, कुछ हम लोग न बोले
अब आटा-चावल भी छुपा तो, भूखों ने मुंह खोले
अरे भीख ना मांगे, अरे कर्ज़ ना मांगे
ये अपना हक़ मांगती है
ये जो पब्लिक है...


नाच मेरी बुलबुल - Naach Meri Bulbul (Kishore Kumar, Roti)




Movie/Album: रोटी (1974)


Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल


Lyrics By: आनंद बक्षी


Performed By: किशोर कुमार





नाच मेरी बुलबुल की पैसा मिलेगा 


कहाँ कदरदान हमें ऐसा मिलेगा 


घूंघरू बना के पाँव में बाँध ले


फिर मेहरबान हमें ऐसा मिलेगा 


नाच मेरी बुलबुल...




मौसम रंगीन है, आशिक शौक़ीन है
तो जो चाहे करले, मौका हसीन है
फिर कब न जाने हमें ऐसा मिलेगा
नाच मेरी बुलबुल...

कितना प्यासा है, ये पैसे वाला 


तो इसको पीला दे तू, ओ मस्ती का प्याला 


कहीं अनजान हमें ऐसा मिलेगा


नाच मेरी बुलबुल...





अपनी तमन्ना है कितनी छोटी


दो हाथ कपड़ा दो वक़्त रोटी 


कहाँ पे मकान हमें ऐसा मिलेगा


नाच मेरी बुलबुल...



गोरे रंग पे न इतना - Gore Rang Pe Na Itna (Kishore Kumar, Lata Mangeshkar)



Movie/Album: रोटी (1974)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: किशोर कुमार, लता मंगेशकर

गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर
गोरा रंग दो दिन में ढल जायेगा
मैं शमा हूँ तू है परवाना
मुझसे पहले तू जल जायेगा
गोरे रंग पे न इतना...

रूप मिट जाता है
ये प्यार ऐ दिलदार नहीं मिटता
हो फूल मुरझाने से
गुलज़ार ओ सरकार नहीं मिटता
क्या बात कही है, होय (ओये) तौबा
ये दिल बेईमान मचल जायेगा
गोरे रंग पे न इतना...

ओ आपको है ऐसा इनकार
तो ये प्यार यहीं छोड़ो
ओ प्यार का मौसम है
बेकार की तकरार यहीं छोड़ो
हाथों मे हाथ ज़रा दे दो
बातों में वक्त निकल जायेगा
गोरे रंग पे न इतना...

ओ मैं तुझे कर डालूं
मसरूर नशे में चूर तो मानोगे
ओ तुमसे मैं हो जाऊं
कुछ दूर ऐ मगरूर हो मानोगे
तू लाख बचा मुझसे दामन
ये हुस्न का जादू चल जायेगा
गोरे रंग पे न इतना...


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