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ग़म का खज़ाना - Gham Ka Khazana (Jagjit Singh, Lata Mangeshkar, Sajda)



Movie/Album: सजदा (1991)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी
ये अफ़साना तेरा भी है, मेरा भी

अपने ग़म को गीत बना कर गा लेना
राग़ पुराना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

तू मुझको और मैं तुझको समझाऊं क्या
दिल दीवाना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

शहर मे गलियों-गलियों जिसका चर्चा है
वो अफ़साना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...

मयख़ाने की बात न कर वाईज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है, मेरा भी
ग़म का ख़ज़ाना...


उसकी गली में फिर मुझे - Uski Gali Mein Phir Mujhe (Chandan Dass, Deewangee)



Movie/Album: दीवानगी (1992)
Music By: ललित सेन
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: चन्दन दास

उसकी गली में फिर मुझे एक बार ले चलो
मजबूर करके मुझे मेरे यार ले चलो

शायद ये मेरा वहम हो, मेरा ख्याल हो
मुमकिन है मेरे बाद उसे, मेरा मलाल हो
पछता रहा हो अब मुझे, दर से उठा के वो
बैठा हो मेरी राह में, आँखें बिछा के वो
उसने भी तो किया था मुझे प्यार ले चलो, ले चलो
उसकी गली में फ़िर मुझे...

दिवाना कह के लोगों ने हर बात टाल दी
दुनिया ने मेरे पाँव में ज़ंजीर डाल दी
चाहो जो तुम तो मेरा मुक़द्दर संवार लो
यारों ये मेरे पाँव की बेड़ी उतार दो
उसने किया है मिलने का इक़रार, ले चलो, ले चलो
उसकी गली में फ़िर मुझे...


मैं न हिन्दू न मुसलमान - Main Na Hindu Na Musalmaan (Jagjit Singh, Mirage)



Movie/Album: माईरेज (1996)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह

मैं न हिन्दू न मुसलमान, मुझे जीने दो
दोस्ती है मेरा इमान, मुझे जीने दो
मैं न हिन्दू न मुसलमां

कोई एहसां न करो मुझपे तो एहसां होगा
सिर्फ़ इतना करो एहसान, मुझे जीने दो
मैं न हिन्दू न मुसलमां

सब के दूख-दर्द को बस अपना समझ कर जीना
बस यही है मेरा अरमान, मुझे जीने दो
मैं न हिंदू न मुसलमां

लोग होते हैं जो हैरान मेरे जीने से
लोग होते रहें हैरान, मुझे जीने दो
मैं न हिंदू न मुसलमां...


आज हम बिछड़े हैं तो कितने - Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne (Jagjit Singh, Love is Blind)



Movie/Album: लव इज़ ब्लाइंड (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: शाहिद कबीर
Performed By: जगजीत सिंह

आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गए
मेरी आँखें सुर्ख़, तेरे हाथ पीले हो गए

कब की पत्थर हो चुकी थी, मुंतज़िर आँखें मगर
छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...

जाने क्या एहसास साज़-ए-हुस्न के तारों में है
जिनको छूते ही मेरे नग़मे रसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...

अब कोई उम्मीद है 'शाहिद', न कोई आरज़ू
आसरे टूटे तो जीने के वसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो...


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